“चक्रवृद्धि ब्याज का शक्ति”(Power of Compounding in Hindi)परिभाषा:

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कुछ समय पहले एक राजा था। वह बहुत दयालु था। उसके राज्य में एक अकल्मन्द चोर हुआ करता था और उसे मरण दंड दिया गया था। राजा उस चोर का आखरी इच्छा पूरी करना चाहता था। इसी लिए वे उस चोर से पूछता था की उस चोर का आखरी इच्छा क्या है। चोर राजा से चावल के दाने मांगता था। कितने चावल के दाने पूछने पर चोर राजा को शतरंज खेलता हुआ…